नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। सावन में नाग पंचमी का त्योहार बड़े ही उल्लास से मनाने की प्रथा है। जहां हर हिंदू घरो में द्वार पर इस दिन साफ मिट्टी व गाय के गोबर से नाग-नागिन का जोड़ा बनाकर व इन्हें दूध,लावा चढ़ाकर इनकी पूजा करते है इसके बाद ही चूल्हें जलाने का प्रचलन है। इस दिन नाग देव के मंदिरों के दर्शन का भी विधान है जिसमें मात्र दर्शन से सभी प्रकार के कष्टों का निवारण होता है आज इस लेख से जानेगें भारत के प्राचीन नाग मंदिरों के बारे में।
बता दें हर साल पड़नेवाले सावन के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी मनाया जाता है जहां इस दिन विधि विधान से पूजा अर्चना की मान्यता है ऐसे में नाग पंचमी पर दर्शंन करने से कालसर्पदोषों से भी छुटकारा मिलता है। आज जानेगें नाग पंचमी के मौके पर नाग देव के मंदिरों के दर्शन के बारे में
उज्जैन का नागचंद्रेश्वर मंदिर
मध्य प्रदेश में दो ज्योतिर्लिंग मंदिर मौजूद है जहां नाग देवता का एक प्राचीन मंदिर भी है। नागचंद्रेश्वर मंदिर उज्जैन के प्रसिद्ध महाकाल मंदिर की तीसरी मंजिल पर स्थित है। यह मंदिर के कपाट साल में सिर्फ एक बार नागपंचमी के दिन ही भक्तों के दर्शन के लिए खुलते हैं। मंदिर में भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी दशमुखी सर्प शय्या पर विराजित हैं।
भीमताल का कर्कोटक नागराज मंदिर
उज्जैन के महाकाल में कर्कोटक नाग मंदिर जहां पूजा करने से सर्प दोष से मुक्ति मिलती है। लेकिन कर्कोटक नागराज का सबसे प्राचीन मंदिर नैनीताल के पास है। भीमताल के कर्कोटक नाम की पहाड़ी के ऊचांई पर बना मंदिर का इतिहास लगभग 5 हजार साल से अधिक पुराना है।
केरल का मन्नारशाला नाग मंदिर
केरल के अलेप्पी जिले में मन्नारशाला नाग मंदिर जहां एक या दो नहीं बल्कि 30 हजार नागों की प्रतिमाएं हैं। यहां नागराज के साथ उनकी जीवनसंगिनी नागायक्षी देवी विराजमान हैं।
जम्मू कश्मीर का शेषनाग मंदिर
जम्मू कश्मीर में नाग देवता का प्राचीन मंदिर है जहां शेषनाग मंदिर के नाम से प्रसिद्ध यह नाग मंदिर पीर पंजाल पर्वत में स्थित है। इस मंदिर का इतिहास 600 साल पुराना है। कश्मीर का अनंतनाग क्षेत्र पहले नागवंशियों का गढ़ था। इसलिए, इस मंदिर में नागपंचमी का भव्य उत्सव होता है, जिसमें हजारों तीर्थयात्री शामिल होते हैं।





