नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष सैम पित्रोदा के खिलाफ दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट में चार्जशीट दायर की है। न्यायाधीश विशाल गोगने ने 9 अप्रैल को दाखिल हुई इस चार्जशीट पर सुनवाई की अगली डेट 25 अप्रैल तय की है।
क्या है नेशनल हेराल्ड केस?
भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुब्रमण्यम स्वामी ने 2012 में ट्रायल कोर्ट में एक याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि कुछ कांग्रेसी नेताओं ने गलत तरीके से यंग इंडियन लिमिटेड के जरिए एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड का अधिग्रहण कर लिया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि दिल्ली में बहादुर शाह जफर मार्ग पर स्थित हेराल्ड हाउस की 2000 करोड़ रुपये की बिल्डिंग पर कब्जा करने के लिए कंपनी की संपत्ति को सिर्फ 50 लाख रुपये देकर हड़प लिया गया।
जवाहरलाल नेहरू ने की थी नेशनल हेराल्ड की स्थापना
बता दें कि नेशनल हेराल्ड अखबार की स्थापना जवाहर लाल नेहरू ने स्वतंत्रता सेनानियों के साथ मिलकर वर्ष 1938 में की थी। आजादी के बाद ये अखबार कांग्रेस का मुखपत्र बन गया। इस अखबार की मालिकाना कंपनी एसोसिएट्स जर्नल्स लिमिटेड है। इस अखबार का प्रकाशन तीन भाषाओं में होता था। धीरे-धीरे यह अखबार नुकसान में चला गया और कांग्रेस से मिले 90 करोड़ रुपए के कर्ज के बावजूद 2008 में इसका प्रकाशन बंद करना पड़ा ।
कांग्रेस ने 26 फरवरी 2011 को इसकी 90 करोड़ रुपये की देनदारियों को अपने जिम्मे ले लिया था। इसका मतलब यह हुआ कि पार्टी ने इसे 90 करोड़ का लोन दे दिया। इसके बाद 5 लाख रुपये से यंग इंडियन कंपनी बनाई गई, जिसमें सोनिया और राहुल की 38-38 फीसदी हिस्सेदारी है। बाकी की 24 फीसदी हिस्सेदारी कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडीज (दोनों अब दिवंगत) के पास थी।
2014 में ईडी ने लिया स्वत: संज्ञान
प्रवर्तन निदेशालय ने अगस्त 2014 में इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था। तब इस मामले में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, कांग्रेस के तत्कालीन कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा, पूर्व केंद्रीय मंत्री ऑस्कर फर्नांडीज, सैम पित्रोदा और सुमन दुबे आरोपी बनाए गए थे। इनमें से मोती लाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडीज दिवंगत हो चुके हैं।
ED ने 16 ठिकानों पर मारे थे छापे
ईडी ने इस मामले में दिल्ली, मुंबई और कोलकाता समेत 16 ठिकानों पर छापेमार कार्रवाई की थी। इसके बाद सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे समेत अन्य से भी पूछताछ हुई थी। ED को जांच में पता चला था कि एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड के पास दिल्ली, मुंबई और लखनऊ में 661.69 करोड़ रुपए की अवैध संपत्तियों पर यंग इंडियन लिमिटेड का कब्जा है। इसके अलावा AJL ने इसमें 90.21 करोड़ रुपए की अवैध इनकम निवेश किया है। इसके बाद ईडी ने इस प्रॉपर्टी को अटैच कर लिया था।
988 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग
26 फरवरी 2011 को कांग्रेस ने AJL की 90 करोड़ रुपये की देनदारियों को अपने जिम्मे ले लिया था। मतलब यह कि पार्टी ने इसे 90 करोड़ का लोन दिया था। इसके बाद 5 लाख रुपये से यंग इंडियन कंपनी बनाई गई, जिसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी की 38-38 प्रतिशत हिस्सा निर्धारित किया गया।
शेष 24 फीसदी हिस्सा कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडीज के पास रहा। इसके बाद AJL ने 10-10 रुपये के 9 करोड़ शेयर यंग इंडियन लिमिटेड को ट्रांसफर कर दिए और इसके बदले में कांग्रेस ने AJL का लोन माफ कर दिया। ईडी का आरोप है कि AJL की 2000 करोड़ रुपये की संपत्ति धोखाधड़ी कर कब्जे में कर लिया गया है। ईडी का यह भी आरोप है कि इस प्रक्रिया में 988 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग हुई है।





