नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। लोकसभा में आज वक्फ बिल पेश कर दिया गया है। लोकसभा में बिल पर बहस जारी है। संसद के दोनों सदनों में अगर ये बिल पास हो गया तो राष्ट्रपति की सहमति के बाद यह बिल कानून में तब्दील हो जाएगा। वक्फ़ संशोधन बिल पर बहस के बीच लोग यह जानने को उत्सुक हैं कि आखिर वक्फ का मतलब होता क्या है और इसकी भारत में आमद कब हुई?
1954 में बना था Waqf Act
इस्लाम धर्म के भारत में एंट्री करने के साथ ही वक्फ की आमद मानी जा सकती है, हालांकि इसके इतिहास को लेकर यह कहीं स्पष्ट नहीं है कि इसकी शुरूआत किस कालखंड में हुई। माना जाता है कि भारत में वक्फ की परंपरा का इतिहास 12वीं सदी में दिल्ली सल्तनत के समय से जुड़ा है और भारत में आजादी के बाद 1954 में पहली बार वक्फ एक्ट बना था।
क्या है वक्फ शब्द का अर्थ
‘वक्फ’ अरबी भाषा के ‘वकुफा’ शब्द से बना है, जिसका अर्थ है ठहरना या रोकना। इस्लाम में वक्फ का अर्थ है कि जब कोई व्यक्ति धार्मिक वजह से या ईश्वर के नाम पर अपनी प्रॉपर्टी दान करता है तो इसे प्रॉपर्टी को वक्फ कर देना यानी रोक देना कहते हैं। यह एक तरीके का दान ही होता है और इसका दानदाता चल या अचल संपत्ति दान कर सकता है, फिर चाहे वो कुछ रुपये, प्रॉपर्टी या बहुमूल्य धातु हो। दान की गई इस प्रॉपर्टी को ‘अल्लाह की संपत्ति’ कहा जाता है और अपनी प्रॉपर्टी वक्फ को देने वाला इंसान ‘वकिफा’ कहलाता है।
भारत में कब शुरू हुई वक्फ की परंंपरा
भारत में वक्फ की परंपरा और इसका इतिहास 12वीं सदी में दिल्ली सल्तनत के समय से जुड़ा है। तब वक्फ की संपत्ति की शुरुआत सिर्फ दो गांवों के दान से हुई थी। इन दो गांवों का कनेक्शन मोहम्मद गोरी से जुड़ा है। 12वीं शताब्दी के आखिर में पृथ्वीराज चौहान से जीतने के बाद मोहम्मद गौरी ने सैन्य ताकत और इस्लामिक संस्थानों को बढ़ाकर अपनी सत्ता मजबूत करने की कोशिश की थी। मोहम्मद गौरी ने मुसलमानों की शिक्षा और उनकी इबादत के लिए मुल्तान की जामा मस्जिद के लिए दो गांव दान में दिए थे। भारत में इसको वक्फ के पहले उदाहरण में से एक माना जाता है।
1954 में पहली बार वक्फ एक्ट बना
भारत में आजादी के बाद 1954 में पहली बार वक्फ एक्ट बना था और फिर साल 1995 में इस एक्ट में कुछ संशोधन हुई और इसके बाद फिर नया वक्फ एक्ट बना। इसमें भी वर्ष 2013 में कई बदलाव किए गए थे इसके बाद 2024 को लोकसभा में वक्फ एक्ट में संशोधन कर नया वक्फ बिल पेश किया गया, जिसके खिलाफ देश भर में विरोध प्रदर्शन हुए थे।
विरोध के बाद बिल का ड्राफ्ट तैयार
विरोध के बाद बिल का ड्राफ्ट तैयार किया गया और इसे संसद की जेपीसी को भेज दिया गया, जिस पर चर्चा हुई और 27 जनवरी 2025 को जेपीसी ने बिल के ड्राफ्ट को मंजूरी देकर सुझाए गए 14 संशोधनों को स्वीकार किया। इसके बाद 13 फरवरी 2025 को जेपीसी की रिपोर्ट संसद में पेश की गई। 19 फरवरी 2025 को कैबिनेट की बैठक में वक्फ के संशोधित बिल को मंजूरी मिल गई और अब आज यानी दो फरवरी को यह बिल संसद में पेश होगा, जिसपर 8 घंटे की बहस होगी और फिर इस पर वोटिंग होगी।
कैसा है नया वक्फ बिल ?
सरकार ने अपने सहयोगी दलों की मांग को स्वीकार करते हुए नए बिल में कई परिवर्तन किए हैं। जिसमें पांच सालों तक इस्लाम धर्म का पालन करने वाला ही वक्फ को अपनी संपत्ति दान कर सकेगा। दान की जाने वाली संपत्ति से जुड़ा कोई विवाद होने पर उसकी जांच के बाद ही अंतिम फैसला होगा। इसके साथ ही पुराने कानून की धारा 11 में संशोधन को भी स्वीकार कर लिया गया है, जिसमें कहा गया है कि वक्फ बोर्ड के पदेन सदस्य चाहे वह मुस्लिम हों या गैर मुस्लिम, उसे गैर मुस्लिम सदस्यों की गिनती में शामिल नहीं किया जाएगा। इसका अर्थ यह कि वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिम सदस्यों की संख्या बढ़ सकती है।




