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Tuesday, March 3, 2026
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‘राज्यों में भाषा के नाम पर राजनीति ठीक नहीं है’ संविधान पर RSS नेता के बयान पर बोली BSP सुप्रीमो मायावती

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह-कार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले के संविधान की प्रस्तावना पर सियासत तेज हो गई है। अब इस मामले में BSP सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती की भी प्रतिक्रिया आई है।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह-कार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले के संविधान की प्रस्तावना पर दिए जा रहे बयान को लेकर सियासत तेज हो गई है । जहां अब इस मामले में बीएसपी सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। बसपा चीफ मायावती ने कहा कि समय समय पर संविधान में गैर जरूरी परिवर्तन किए गए हैं, भारतीय संविधान की मूल भावना प्रस्तवाना में दर्शया गया है, उसमें छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए। 

बता दें, बसपा सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा कि,देश के कई राज्यों में भाषा के नाम पर राजनीति ठीक नहीं है। हमें सभी भाषाओं को सम्मान देना चाहिए। इसीके साथ आगे बसपा चीफ मायावती ने कहा कि सत्ताधारी पार्टी के दिल में कुछ और और जुबान पर कुछ और है। पार्टियों को अपने संकीर्ण विचार से ऊपर उठकर संविधान से छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए। हमें भी अपनी आवाज को देशभर में उठाना पड़ेगा।

‘देश के कई राज्यों में भाषा के नाम पर राजनीति ठीक नही’

बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि, देश के कई राज्यों में भाषा के नाम पर राजनीति ठीक नहीं है सभी भाषाओं को सम्मान देना चाहिए। इसे लेकर सरकार और पार्टियों में टकराव होना ठीक नहीं है। बिहार में वोटर लिस्ट वाले मामले पर कहा कि चुनाव आयोग को अपनी स्थिति स्पष्ट करना चाहिए और पार्टियों को विश्वास में लेना चाहिए। 

‘संविधान विरोधी चेहरे को नहीं बदलेंगे तो हमें आना होगा’

मायावती ने कहा कि, बाबा साहब के संविधान पर कांग्रेस और बीजेपी ने अपना विश्वास नहीं जताया है, पार्टी अपनी-अपनी पार्टी की विचारधारा अपनाती है। दोनों पार्टी दोहरे चरित्र के साथ एक हो जाती हैं, अगर ये संविधान विरोधी चेहरे को नहीं बदलेंगे तो हमें आना होगा. उन्होंने कहा कि बंगाल में हमारी महिला सुरक्षित नहीं हैं.

क्या बोले थे दत्तात्रेय होसबाले?

इससे पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने 27 जून 2025 को दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान संविधान की प्रस्तावना से समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष शब्दों को हटाने की वकालत की थी। उन्होंने कहा कि ये शब्द वर्तमान में 1975 के आपातकाल के दौरान 42वें संशोधन के जरिए संविधान में शामिल किए गए थे इन्हें कृत्रिम मानते हुए हटाने की आवश्यकता है।

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