नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। दिल्ली हाई कोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा के घर पर आग लगी। आग बुझाने की कोशिश के दौरान उनके घर से भारी मात्रा में कैश बरामद हुआ। कैश बरामद होने के बाद सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने जस्टिस वर्मा का ट्रांसफर इलाहाबाद हाईकोर्ट में करने की सिफारिश की है। इस पूरी घटने के बाद जस्टिस वर्मा के खिलाफ जांच और अभियोग लाने की मांग भी शुरू हो गई है।
कैसे सामने आया कैश
बीते दिनों जस्टिस वर्मा के दिल्ली स्थित घर पर आग लगी। जस्टिस वर्मा घर पर नहीं थे। परिवारवालों ने ही फायर ब्रिगेड को सूचना दी। आग बुझाने की कोशिश के दौरान फायर ब्रिगेड को बड़ी मात्रा में कैश मिला। कैश मिलने के बाद इसे रिकॉर्ड में लिया गया और चीफ जस्टिस को इसकी जानकारी दी गई। इस मामले पर कॉलेजियम की बैठक बुलाई गई। इस बैठक में जस्टिस वर्मा के ट्रांसफर की सिफारिश की गई।
मिली जानकारी के मुताबिक, कैश बरामद होने के बाद कॉलेजियम की एमरजेंसी मीटिंग बुलाई गई थी। चीफ जस्टिस संजीव खन्ना की अध्यक्षता में हुई कॉलेजियम की बैठक में इनहाउस जांच पर भी विचार किया गया। वहीं, कॉलेजियम के कई सदस्यों ने चिंता जाहिर की है कि केवल ट्रांसफर करने पर सही संदेश नहीं जाएगा और न्यायपालिका की छवि पर सवाल उठेंगे।
साल 2021 में बने थे दिल्ली हाईकोर्ट के जज
जस्टिस वर्मा ने 1992 में बतौर वकील इलाहाबाद हाईकोर्ट में वकालत शुरू की थी। साल 2006 में उन्हें विशेष अधिवक्ता का दर्जा मिला। साल 2012 में वह यूपी सरकार के स्थायी वकील बन गए और 2013 में सीनियर एडवोकेट बने। इसके एक साल बाद ही जस्टिस वर्मा को इलाहाबाद हाईकोर्ट में एडिशनल जज के तौर पर पदोन्नत किया गया। साल 2026 में वो इलाहाबाद हाईकोर्ट में रेलुगर जज बने। 2021 में उनका तबादला दिल्ली हाईकोर्ट में किया गया था। तब से जस्टिस वर्मा दिल्ली हाईकोर्ट में सेवाएं दे रहे थे। अब कैश बरामद होने के बाद कॉलेजियम ने उन्हें वापस इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजने की सिफारिश की है।




