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Thursday, March 12, 2026
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Birthday Special: 7 साल की उम्र में मां-बहन को खोया! आज 83 साल के हुए खरगे-जानिए जन्मदिन पर उनकी अनसुनी कहानी

कांग्रेस के अध्यक्ष खरगे का जन्म 1942 में आज ही के दिन कर्नाटक के बीदर जिले के छोटे से गांव वरावट्टी में हुआ था। 83 साल की उम्र में भी वे सक्रिय राजनीति में हैं और पार्टी की कमान संभाल रहे है।

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का जन्म 1942 में आज ही के दिन कर्नाटक के बीदर जिले के छोटे से गांव वरावट्टी में हुआ था। 83 साल की उम्र में भी वे सक्रिय राजनीति में हैं और पार्टी की कमान मजबूती से संभाल रहे हैं। मल्लिकार्जुना खरगे दो दशक बाद कांग्रेस के ऐसे पहले अध्यक्ष बने हैं जो गांधी परिवार से नहीं हैं। वे 2020 से राज्यसभा सांसद हैं और 2021 से राज्यसभा में विपक्ष के नेता भी हैं। पार्टी और सरकार में वह कई अहम पदों पर रह चुके हैं।

7 साल की उम्र में आंखों के सामने मां-बहन को खोया

मल्लिकार्जुन खरगे का जीवन बचपन से ही संघर्षों से भरा रहा है। जब वो सिर्फ 7 साल के थे, तब उन्होंने अपनी मां और बहन को अपनी आंखों के सामने जिंदा जलते देखा। यह हादसा 1948 में हुआ था, जब हैदराबाद के निजाम की निजी सेना ‘रजाकारों’ ने उनके गांव में हमला कर दिया और उनके घर को आग के हवाले कर दिया।

बेटे प्रियांक ने सुनाया दर्दनाक किस्सा

मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे प्रियांक खरगे ने इस वाकये को एक टीवी इंटरव्यू में साझा किया। उन्होंने बताया कि उस समय रजाकारों ने पूरे इलाके में लूटपाट और आगजनी की थी। उनके दादा खेतों में काम कर रहे थे जब एक पड़ोसी ने आकर बताया कि घर में आग लगा दी गई है। दौड़ते हुए घर पहुंचे तो सिर्फ अपने बेटे मल्लिकार्जुन को ही बचा सके। मां और बहन की जलकर मौत हो गई। रजाकार निज़ाम की एक निजी सेना थी, जो हैदराबाद रियासत को भारत में शामिल करने के खिलाफ थी। वे चाहते थे कि हैदराबाद पाकिस्तान में मिले या एक अलग मुस्लिम राष्ट्र बने। 15 अगस्त 1947 को जब भारत आज़ाद हुआ, तब भी हैदराबाद में तिरंगा फहराना अपराध था। भारत सरकार ने ‘ऑपरेशन पोलो’ के ज़रिए हैदराबाद को भारत में मिलाने की कोशिश की, और इसी दौरान रजाकारों ने गांवों पर हमले तेज कर दिए।

जान बचाकर भागे, फिर की पढ़ाई

मल्लिकार्जुन खरगे और उनके पिता जान बचाकर झाड़ियों में छिप गए। बाद में बैलगाड़ी से पुणे जाकर अपने रिश्तेदार से मिले, जो सेना में थे। इसके बाद वे कलबुर्गी लौट आए और वहां से एक नई शुरुआत की। खरगे ने एक कपड़ा मिल में काम करते हुए पढ़ाई की। उन्होंने बीए और फिर लॉ की पढ़ाई पूरी की। राजनीति में आने से पहले खरगे एक कानूनी पेशेवर वकील थे। वे बौद्ध धर्म के अनुयायी हैं और सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट के संस्थापक-अध्यक्ष भी हैं। खरगे ने 13 मई 1968 को राधाबाई से शादी की। उनके तीन बेटे और दो बेटियां हैं। बेटा प्रियांक खरगे कर्नाटक में विधायक और मंत्री रह चुके हैं।

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