नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। देश के गौरवशाली इतिहास में 26/11 एक ऐसा दिन है जो कलंक की तरह चिपक गया है। आज से ठीक से 16 साल पहले मुंबई का ताज होटल खून से लाल हो गया था। पाकिस्तान की कोख से जन्मे लश्कर ए तैयबा ने 10 आतंकवादियों को समुद्र के रास्ते मुंबई मे प्रवेश कराया। इसके बाद जो मुंबईकरों ने देखा वो खौफनाक मंजर था। अजमल कसाब समेत सारे आतंकवादियों ने ताज होटल समेत कई ठिकानों पर ताबड़तोड हमले शुरु कर दिए जिसमें 160 से ज्यादा लोग मारे गए और 200 से ज्यादा घायल हुए। आज इस हमले की 16वीं बरसी है। आज के इस मौके पर जानेंगे भारत को कभी न भुला पाने वाला दुख देने वाले आतंकी अजमल कसाब को भारत ने कैसे सजा दी।
मौत को सामने देख थर्रा गया था आतंक का सरगना अजमल कसाब
26/11 हमले का मुख्य आरोपी अजमल कसाब एकलौता ऐसा आतंकवादी थी जिसे सुरक्षा एजेंसियों ने जिंदा पकड़ लिया था। कसाब को न्यायिक हिरासत मे लिया था और चार साल तक चली कार्यवाई के बाद अदालत ने उसे फांसी का फैसला सुनाया। 21 नवंबर 2012 को कसाब को फांसी दे दी गई। हालांकि फांसी का फंदा सामने देख कसाब घबारा गया था। फांसी से पहले की देर रात करीब 1 बजे कसाब सोने चला गया था। अगली सुबह तड़के 4 बजे जेल आधिकारियों ने उसे उठाया और उसे चाय दी गई। घडी की टिक टिक कसाब को फांसी के करीब ले जा रही थी। सुबह 6:30 बजे कसाब को उस जगह ले जाया गया जहां उसे फांसी दी जानी थी। उसकी शारीरिक जांच की गई।
शारीरिक जांच के बाद कसाब को फांसी के लिए तैयार किया गया। कसाब का चेहरा ढक दिया गया। अब सिर्फ फांसी पर लटकाए जाने की देर थी। दोनों हाथों को पीछे बांध दिया गया। इस दौरान कसाब माफी की मांग कर बिलखने लगा। कसाब ने कहा कि अल्लाह मुझे माफ करे। वहां मौजूद आधिकारियों से भी उसने कहा कि साहब एक बार माफ कर दो। ठीक 7:30 बजते ही फांसी का लिवर खींच दिया गया और 7 मिनट के बाद आंतक के सरगना का खात्मा हो गया।




