नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । नॉर्वे की राजधानी ओस्लो से दुनिया भर में शुक्रवार को एक बड़ी खबर आई। 2025 के नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा कर दी गई, जिसमें वेनेजुएला की प्रमुख विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो को यह प्रतिष्ठित सम्मान दिया गया। मचाडो ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समेत दुनिया के कई चर्चित नेताओं और संस्थानों को पछाड़ते हुए यह पुरस्कार अपने नाम किया। यह सम्मान मचाडो को वेनेजुएला में लोकतंत्र, मानवाधिकार और स्वतंत्र चुनावों की बहाली के लिए वर्षों से चले उनके संघर्ष के लिए दिया गया है। ओस्लो में आयोजित समारोह में उन्हें नोबेल मेडल और लगभग सात करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की गई।
वेनेजुएला में लोकतंत्र की लड़ाई
मारिया कोरिना मचाडो का नाम आज पूरी दुनिया में लोकतंत्र के प्रतीक के रूप में लिया जा रहा है। वह लंबे समय से राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की सरकार की कट्टर आलोचक रही हैं और उन्होंने नागरिक अधिकारों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक सुधारों के लिए कई बड़े जन आंदोलन का नेतृत्व किया है।
मचाडो 2011 से 2014 तक वेनेजुएला की राष्ट्रीय सभा की निर्वाचित सदस्य रहीं। इसी दौरान उन्होंने पारदर्शिता, भ्रष्टाचार विरोध और विपक्ष की मजबूती के मुद्दों को संसद के भीतर और बाहर उठाया। उनका जन्म 7 अक्टूबर 1967 को काराकस में हुआ था और वह पेशे से औद्योगिक इंजीनियर हैं। मचाडो ने तकनीकी पृष्ठभूमि के बावजूद अपना करियर जनसेवा और राजनीति के लिए समर्पित कर दिया।
नोबेल चयन प्रक्रिया
नोबेल समिति के अनुसार इस वर्ष शांति पुरस्कार के लिए कुल 338 नामांकन प्राप्त हुए थे, जिनमें वैश्विक स्तर पर चर्चित नेता, मानवाधिकार कार्यकर्ता और संस्थाएं शामिल थीं। इनमें अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम भी था। ट्रंप ने स्वयं कई बार दावा किया था कि उनके कार्यकाल में उन्होंने आठ युद्ध रुकवाए, जिसके लिए उन्हें इस प्रतिष्ठित पुरस्कार का हकदार माना जाना चाहिए। उनकी दावेदारी को पाकिस्तान, इज़रायल, अर्मेनिया, अजरबैजान, कंबोडिया और रवांडा समेत कई देशों के नेताओं का समर्थन भी मिला था। इसके बावजूद, समिति ने मारिया कोरिना मचाडो को अधिक योग्य पाया और उनका चयन किया। समिति ने स्पष्ट किया कि मचाडो का निरंतर, अहिंसक और साहसिक संघर्ष, जो भारी राजनीतिक दमन के बीच संचालित हुआ, उन्हें इस सम्मान का वास्तविक हकदार बनाता है।
अंतरराष्ट्रीय पहचान और पूर्व के सम्मान
मारिया कोरिना मचाडो को नोबेल शांति पुरस्कार से पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं। साल 2024 में उन्हें यूरोपीय संघ का सबसे बड़ा मानवाधिकार सम्मान, सखारोव पुरस्कार, प्रदान किया गया था। यह पुरस्कार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मानव अधिकारों के लिए उनके लगातार प्रयासों को देखते हुए दिया गया। मचाडो ने कई बार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर वेनेजुएला में मानवाधिकार उल्लंघन, राजनीतिक बंदियों और अभावग्रस्त जनता की समस्याओं को उठाया है। उन्होंने विदेशी देशों से लोकतांत्रिक सुधारों के लिए दबाव बनाने की अपील भी की है। उनके प्रयासों के चलते वेनेजुएला की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ में बार-बार चर्चा हुई है।
डोनाल्ड ट्रंप के लिए झटका
एक समय पर यह माना जा रहा था कि नोबेल शांति पुरस्कार ट्रंप के पक्ष में जा सकता है, क्योंकि उनके समर्थक देशों ने इस पर सार्वजनिक रूप से बयान दिए थे। लेकिन ट्रंप की उम्मीदों को मचाडो ने निर्णायक रूप से खत्म कर दिया। यह निर्णय अमेरिका और ट्रंप समर्थकों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। वहीं, मचाडो की जीत को दुनिया भर के लोकतंत्र समर्थकों ने स्वागत किया है।





