नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । डोनाल्ड ट्रम्प के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद से ही अमेरिका से अप्रवासियों का निर्वासन जारी है। अब, ट्रम्प प्रशासन संयुक्त राज्य अमेरिका में वीजा पर रह रहे लोगों के इमिग्रेशन को रद्द कर रहा है ताकि उन्हें निर्वासित किया जा सके। ऐसे ही एक मामले में चार विदेशी छात्रों ने अब अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग और इमिग्रेशन अधिकारियों के खिलाफ अदालत का रूख किया है। इनमें एक भारतीय छात्र चिन्मय देओरे भी है, जिसने इन विदेशी छात्रों के साथ मिलकर ट्रंप प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर किया है।
अमेरिका की डिपोर्टेशन नीति एक बार फिर चर्चा में आ गई है। इस बार वजह बने हैं भारत के छात्र चिन्मय देओरे। चिन्मय ने वेन स्टेट यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे तीन अन्य विदेशी छात्रों के साथ मिलकर ट्रंप प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। इन छात्रों का कहना है कि बिना किसी नोटिस या सूचना के उनके इमिग्रेशन स्टेटस को समाप्त कर दिया गया है। इमिग्रेशन अधिकारियों की कार्रवाई के कारण उनका भविष्य खतरे में है। उन्होंने ट्रंप प्रशासन पर अंतरराष्ट्रीय छात्रों के खिलाफ सख्त और भेदभावपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया है।
कौन हैं चिन्मय देओरे?
चिन्मय देओरे वेन स्टेट यूनिवर्सिटी में स्नातक की पढ़ाई कर रहे हैं। वह 2004 में अपने परिवार के साथ H4 आश्रित वीजा पर अमेरिका गए थे। चिन्मय और उनका परिवार 2008 में अमेरिका छोड़कर चले गए थे। लेकिन 2014 में उनका परिवार अमेरिका लौट आया। मिशिगन में अपनी हाई स्कूल की शिक्षा पूरी करने के बाद चिन्मय ने एच-4 वीज़ा के तहत वेन स्टेट यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया। जहां वह 2021 से कंप्यूटर साइंस में डिग्री हासिल कर रहे हैं।
2022 में F-1 छात्र का दर्जा
चिन्मय ने अपने एच4 वीजा की अवधि समाप्त होने के बाद मई 2022 में आवेदन किया। इसके बाद उन्हें एफ-1 छात्र का दर्जा दिया गया। उनका कोर्स मई 2025 में पूरा होगा, जिसके बाद वे स्नातक होंगे। स्नातक करने के बाद चिन्मय ने एफ-1 दर्जा वाली कानूनी नौकरी ढूंढने की योजना बनाई। चिन्मय अपने परिवार के साथ कैंटन में रहते हैं।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला अमेरिका की स्टूडेंट एंड एक्सचेंज विजिटर इंफॉर्मेशन सिस्टम (SEVIS) से जुड़ा है। इसमें कुछ अंतरराष्ट्रीय छात्रों का इमिग्रेशन स्टेटस अचानक अवैध घोषित कर दिया गया। जिन छात्रों पर असर पड़ा, उनमें भारत के चिन्मय देओरे, चीन के दो छात्र और नेपाल का एक छात्र शामिल हैं। चीनी मूल का छात्र जियांगयुन अगस्त 2023 से मिशिगन विश्वविद्यालय में मैकेनिकल इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री की पढ़ाई कर रहा है। जबकि अन्य चीनी छात्र कियुई मिशिगन विश्वविद्यालय में पीएचडी छात्र हैं। इसमें नेपाल का छात्र योगेश जोशी भी शामिल है। इन छात्रों ने अमेरिका के होमलैंड सिक्योरिटी विभाग और इमिग्रेशन अधिकारियों के खिलाफ मिशिगन की एक जिला अदालत में मुकदमा दायर किया है। उनकी ओर से यह केस अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन (ACLU) ने दाखिल किया है।
ट्रंप प्रशासन पर लगाए ये आरोप
छात्रों का कहना है कि उन्होंने न तो कोई अपराध किया और न ही किसी इमिग्रेशन नियम का उल्लंघन किया है। वे किसी राजनीतिक गतिविधि या कैंपस विरोध-प्रदर्शन का हिस्सा भी नहीं रहे। उनका आरोप है कि ट्रंप प्रशासन ने बेहद मामूली बातों, जैसे कि पार्किंग टिकट या ट्रैफिक वार्निंग को आधार बनाकर उन्हें देश छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया।
ACLU का क्या कहना है?
ACLU ने इस कार्रवाई को अमेरिकी संविधान के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन बताया है। संगठन की कार्यकारी निदेशक लोरेन खोघाली का कहना है कि प्रशासन का मकसद डर और भ्रम का माहौल बनाना है। वे चुनिंदा लोगों को निशाना बनाकर बाकी अंतरराष्ट्रीय छात्रों को डराने की कोशिश कर रहे हैं। उनका यह भी कहना है कि विदेशी छात्र न केवल अमेरिका के शैक्षणिक माहौल को बेहतर बनाते हैं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था में भी अहम भूमिका निभाते हैं।




