नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। गूगल के बाद अब टेक्नोलॉजी की दिग्गज कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने भी छंटनी का एलान किया है। कंपनी करीब 6000 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाने जा रही है, जो कि माइक्रोसॉफ्ट के कुल कर्मचारियों का लगभग 3 प्रतिशत हिस्सा है। यह कंपनी के इतिहास की दूसरी सबसे बड़ी छंटनी मानी जा रही है।
2023 में हुई थी सबसे बड़ी छंटनी
इससे पहले साल 2023 में 10,000 कर्मचारियों को निकाला गया था, जो अब तक की सबसे बड़ी छंटनी थी। इस बार की छंटनी का असर भी ग्लोबल स्तर पर अलग-अलग विभागों और देशों के कर्मचारियों पर पड़ेगा। कंपनी ने बताया कि यह फैसला लागत में कटौती और AI में हो रहे भारी निवेश की वजह से लिया गया है। FY2025 में माइक्रोसॉफ्ट करीब 80 बिलियन डॉलर AI और डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च करने की योजना बना रही है। माइक्रोसॉफ्ट का कहना है कि वे अपनी प्रबंधन प्रणाली को अधिक कुशल और संगठित बनाना चाहते हैं। इसी कारण यह छंटनी मुख्य रूप से मैनेजमेंट रोल्स यानी प्रबंधन पदों पर काम करने वाले कर्मचारियों को प्रभावित कर रही है।
कर्मचारियों को दिए गए दो विकल्प
छंटनी से प्रभावित कर्मचारियों को माइक्रोसॉफ्ट ने दो विकल्प दिए हैं 60 दिनों की सैलरी, बोनस और इंसेंटिव के साथ कंपनी से अलग होना। परफॉर्मेंस इंप्रूवमेंट प्लान (PIP) का हिस्सा बनकर अपनी पोजिशन बचाने की कोशिश करना। इसके लिए कर्मचारियों को 5 दिनों के भीतर फैसला लेना होगा। PIP को चुनने के बाद दूसरे विकल्प का फायदा नहीं लिया जा सकेगा। अगर कर्मचारी स्वेच्छा से बाहर होने का विकल्प चुनते हैं, तो उन्हें 16 हफ्तों का सेवरेंस पे और ग्लोबल वॉलंटरी सेपरेशन एग्रीमेंट का विकल्प मिलेगा कंपनी के 228,000 कर्मचारियों में से वॉशिंगटन राज्य में करीब 1985 कर्मचारी हैं, जिनमें से कई प्रभावित हुए हैं। छंटनी का असर दुनियाभर के विभिन्न स्तरों के कर्मचारी और विभिन्न विभागों पर पड़ा है। AI में बढ़ते निवेश ने माइक्रोसॉफ्ट को नए बिज़नेस मौके जरूर दिए हैं, लेकिन इससे मार्जिन प्रेशर यानी लागत और मुनाफे के बीच दबाव भी बढ़ा है। हालांकि छंटनी की खबर कर्मचारियों के लिए दुखद है, लेकिन कंपनी का मानना है कि इससे उन्हें दीर्घकालिक स्थिरता और दक्षता हासिल करने में मदद मिलेगी। जनवरी-मार्च तिमाही में माइक्रोसॉफ्ट ने बेहतर मुनाफा और बिक्री दर्ज की है, जो बताता है कि कंपनी वित्तीय रूप से अभी मजबूत स्थिति में है।




