नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। किसी के भी साथ कब क्या हो जाएं ये कहा नही जा सकता कई बार हालात ऐसे बन जाते हैं, जिसके बारे में शायद हमने कभी सोचा भी न हो। इसका आप 12 जून को अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया क्रैश होने की घटना से ही ले लीजिए, क्या किसी को इस घटना होने की शंका थी। अब इसी दौरान इंश्योरेंस कंपनियों के पास कई ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें पॉलिसी होल्डर और नॉमिनी दोनों की ही मौत हो गई है। जिसमें इस पैसे को लेकर ये सवाल उठ रहा कि,अब ये पैसे किसे मिलेंगे। जानें क्या कहता है कानून?
पॉलिसी होल्डर और नॉमिनी दोनों की मौत
12 जून को हुए विमान हादसे के बाद कई इंश्योरेंस कंपनियों के पास कई ऐसे मामले सामने आ रहे है जिनमें पॉलिसी होल्डर और नॉमिनी दोनों की ही मौत हो गई है। ऐसे में हमारे मन में भी एक सवाल आता होगा कि अगर इंश्योरेंस पॉलिसी में पॉलिसी होल्डर और नॉमिनी दोनों की ही मौत हो जाए तो ये पैसे किसे मिलेंगे?
विमान हादसे के बाद कई मामले आ रहे सामने
बता दे कि, एक अंग्रेजी अखबार रिपोर्ट के मुताबिक, अहमदाबाद प्लेन क्रैश के बाद कई ऐसे मामले सामने आए जहां पॉलिसी लेने वाले और क्लेम रिसीव करने वाले नॉमिनी दोनों की ही हादसे में मौत हो गई है। जिसमें अहमदाबाद से लंदन गेटवे के लिए रवाना हुई एयर इंडिया का बोइंग ड्रीमलाइनर विमान मेघानी नगर इलाके में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इसमें क्रू मेंबर्स सहित 241 यात्रियों की मौत हो गई।
क्या जब्त हो जाती है इंश्योरेंस पॉलिसी?
सबसे पहले तो ये जाने कि, बीमा की राशि कभी जब्त नहीं की जाती है, बल्कि पॉलिसी होल्डर की संपत्ति का हिस्सा बन जाती है। आमतौर पर कानूनी उत्तराधिकारी जैसे कि बच्चे, जीवित माता-पिता या जीवनसाथी इसका दावा कर सकते है। ऐसे में एयर इंडिया हादसे के बाद कई बीमा कंपनियों के सामने ऐसे ही मामले आ रहे हैं। जिनमें एलआईसी, इफ्को टोकियो, टाटा एआईजी जैसे कई इंश्योरर्स को ऐसे क्लेम मिले हैं, जिनमें पॉलिसी होल्डर और नॉमिनी दोनों की ही मौत हो गई है।
किसे मिलते हैं क्लेम के पैसे?
एक रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ कंपनियां क्लेम सेटलमेंट के लिए औपचारिकताओं में ढील दे रही हैं जैसे कि एलआईसी, ने कहा कि इन मामलों में कोर्ट से ऑर्डर मिलने का इंतजार करने के बजाय कानूनी उत्तराधिकारियों से डिक्लेरेशन और क्षतिपूर्ति बांड स्वीकार कर रहे हैं, बशर्ते कि उत्तराधिकारी इस बात पर सहमत हों कि, क्लेम सेटलमेंट से मिलने वाली राशि का बंटवारा कैसे करना है। आमतौर पर इंश्योरेंस कंपनियां डॉक्यूमेंट्स की जांच और क्लेम करने वाले व्यक्ति का पॉलिसी होल्डर या नॉमिनी से संबंध की पुष्टि करने के बाद पैसे का भुगतान कर देती हैं।
कानूनी वारिस को दो वर्गों में बांटा गया है
अब दूसरा सवाल यह है कि, इसमें अगर कई कानूनी वारिस हो, तो इस स्थिति में कंपनी क्या करती है? हिंदू उत्तराधिकार कानून में कानूनी वारिस को दो वर्गों में बांटा गया है जिसमें पहले वर्ग में क्लास वन लीगल वारिस जैसे कि बेटा-बेटी, पत्नी, मां. अगर क्लास वन लीगल वारिस में से कोई नहीं है, तो क्लास 2 यानी जिनमें पिता, भाई-बहन, भतीजा-भतीजी पर विचार किया जाता है।





