नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । पूरे देश में गणेश चतुर्थी के इस पावन अवसर पर विघ्नहर्ता गणेश के आगमन को पूरे उत्साह और आस्था के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष इसका आयोजन 27 अगस्त को हो रहा है। विघ्नहर्ता गणेश के स्वागत में देशभर में भव्य पंडाल, सांस्कृतिक कार्यक्रम और पूजा-अर्चना होती है। दस दिवसीय यह पर्व श्रद्धा, उत्साह और सामाजिक एकता का प्रतीक है, जिसका समापन विसर्जन के साथ होता है।
भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को मनाए जाने वाले गणेश उत्सव का धार्मिक महत्व अद्वितीय है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन चंद्र दर्शन वर्जित है, क्योंकि इससे कलंक या झूठे आरोप लगने का भय रहता है। मान्यता है कि स्वयं श्रीकृष्ण को भी इसी कारण स्यमंतक मणि चोरी का झूठा आरोप सहना पड़ा था।
श्रीकृष्ण पर लगा था चंद्र दर्शन का दोष
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को भगवान श्रीकृष्ण ने अनजाने में चंद्रमा का दर्शन कर लिया। उसके बाद उन्हें स्यमंतक मणि चोरी का झूठा आरोप लग गया। इस दोष के कारण उन्हें निर्दोष साबित करने के लिए अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। तभी से मान्यता है कि इस दिन चंद्र दर्शन वर्जित है, अन्यथा कलंक और आरोप झेलने पड़ सकते हैं।
जानिए चंद्रमा को मिले श्राप की कहानी
पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान शिव ने हेरम्ब का वध किया और उनके धड़ पर हाथी का सिर लगाया, तब देवगणों ने उन्हें गजानन नाम से संबोधित किया। इसके बाद माता-पिता की परिक्रमा कर गणेशजी ने यह सिद्ध कर दिया कि माता-पिता ही समस्त जगत के समान हैं। इसी तप और बुद्धिमत्ता से प्रसन्न होकर उन्हें वरदान मिला कि वे सृष्टि के सभी शुभ कार्यों में सर्वप्रथम पूज्य होंगे।
भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को ही क्यों लगेगा श्राप
इस घटना पर समस्त देवी-देवताओं ने भगवान गणेश की स्तुति की, किंतु चंद्रमा अपने सौंदर्य और रूप के अहंकार में मंद-मंद मुस्कुराते रहे। गणेशजी ने इसे उपहास समझकर क्रोधित होकर उन्हें श्राप दिया कि वे अपना तेज खो देंगे और उनका स्वरूप काला हो जाएगा। पश्चाताप से व्याकुल चंद्रमा ने क्षमा मांगी। तब गणेशजी ने श्राप को शिथिल करते हुए वरदान दिया कि उनका कलंक केवल भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को ही दर्शन करने वालों को लगेगा।
भूल से दर्शन होने पर क्या करें
गणेश चतुर्थी पर यदि अनजाने में चंद्र दर्शन हो जाए तो इसे दोषकारी माना जाता है। मान्यता है कि इस दोष से मुक्ति पाने के लिए श्रीकृष्ण-स्यमंतक मणि कथा का पाठ या श्रवण करना चाहिए। साथ ही, प्रत्येक महीने की द्वितीया तिथि को चंद्र दर्शन करना भी कलंक दोष से बचाता है। शास्त्रों में बताया गया है कि चतुर्थी पर यदि चंद्रमा दिख जाए तो विशेष मंत्र का जप करने से भी दोष समाप्त हो जाता है।





