back to top
31.1 C
New Delhi
Wednesday, March 4, 2026
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

बिहार चुनाव 2025 : क्यों NDA को नीतीश कुमार के चेहरे पर है भरोसा? समझें इसके पीछे की रणनीति

2025 बिहार विधानसभा चुनाव एनडीए नीतीश कुमार के चेहरे पर चुनाव लड़ेगा। यह विपक्षी दलों की रणनीति के लिए एक बड़ी चुनौती है। ऐसा करके भाजपा और जदयू ने एकजुटता दिखाकर अटकलों को खारिज किया है।

नई दिल्‍ली / रफ्तार डेस्‍क । बिहार विधानसभा चुनाव की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है और सभी प्रमुख राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीति के साथ मैदान में उतरने लगे हैं। एक तरफ महागठबंधन ने तेजस्वी यादव को कोऑर्डिनेशन कमेटी का प्रमुख बनाकर नेतृत्व की दिशा स्पष्ट की है, वहीं एनडीए ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अपना चेहरा घोषित कर सियासी समीकरणों को दिलचस्प बना दिया है। विशेष बात यह है कि एनडीए की एकजुटता और नेतृत्व को लेकर लग रही तमाम अटकलों को दरकिनार करते हुए बीजेपी और जेडीयू ने मिलकर साफ संदेश दिया है कि गठबंधन पूरी मजबूती से खड़ा है। साथ ही, नीतीश कुमार की सेहत को लेकर उठते सवालों को भी इस कदम से शांत कर दिया गया है।

नीतीश का चेहरा एनडीए को दिलाएगा चुनावी सफलता ?

हालांकि नीतीश सरकार के 20 वर्षों के लंबे कार्यकाल के चलते एंटी-इनकंबेंसी का खतरा बना हुआ है, मगर राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो अब भी नीतीश का चेहरा एनडीए को चुनावी सफलता दिला सकता है। बीजेपी और अन्य सहयोगी दल भी नीतीश कुमार की लोकप्रियता और अनुभव पर भरोसा जताते हैं। साल 2005 में जब नीतीश कुमार ने बिहार की कमान संभाली थी, तब राज्य की छवि ‘जंगलराज’ जैसी बन चुकी थी। सड़कों की दुर्दशा, बिजली की भारी कमी और बिगड़ी कानून-व्यवस्था बिहार की प्रमुख पहचान बन गई थी। लेकिन नीतीश कुमार ने अपने ‘सुशासन’ के मॉडल से इन सभी मोर्चों पर सुधार लाने की कोशिश की। सड़क नेटवर्क के विस्तार, बिजली की नियमित आपूर्ति और शिक्षा व स्वास्थ्य क्षेत्रों में किए गए सुधारों ने राज्य की दिशा बदली है। हाल ही में उद्घाटित कच्ची दरगाह-बिदूपुर छह लेन गंगा पुल इसका बेहतरीन उदाहरण है, जिसने राघोपुर और पटना के बीच की दूरी को महज पांच मिनट कर दिया है। यह पुल सिर्फ संपर्क को बेहतर नहीं बनाता, बल्कि इससे व्यापार, रोजगार और निवेश के नए रास्ते भी खुलने की उम्मीद है।

नीतीश के विकास मॉडल ने फिर बढ़ाया भरोसा

बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा किए गए विकास कार्य और सामाजिक कल्याण की योजनाएं उनके नेतृत्व को मजबूती प्रदान करती हैं। हाल ही में राज्य सरकार ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत दी जाने वाली राशि को 400 रुपये से बढ़ाकर 1200 रुपये प्रति माह करने की घोषणा की है। यह निर्णय वृद्ध, विधवा और दिव्यांगजन जैसी कमजोर वर्गों के लिए एक बड़ी राहत है, खासकर ग्रामीण बिहार में, जहां यह तबका एक अहम वोट बैंक माना जाता है।

यह पहल नीतीश कुमार की समावेशी नीतियों का प्रतिबिंब है, जिन्होंने अति-पिछड़ा और महादलित समुदाय को मुख्यधारा में शामिल करने में भूमिका निभाई है। इसके अलावा, शराबबंदी, महिलाओं को पंचायत चुनावों में 50% आरक्षण, और पुलिस बल में 35% महिला आरक्षण जैसे निर्णयों ने महिलाओं के बीच नीतीश की लोकप्रियता को और अधिक बढ़ाया है। इन योजनाओं को तेजस्वी यादव की ‘माई-बहिन मान योजना’ के जवाब में एनडीए की एक प्रभावी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है, जो गठबंधन को चुनावी बढ़त दिला सकती है।

सीएम नीतीश की साख, पीएम मोदी की ताकत

नीतीश कुमार की विकास और कल्याण पर केंद्रित राजनीति ने उनकी विश्वसनीयता को और मजबूत किया है, जिस पर एनडीए का पूरा विश्वास बना हुआ है। उनके क्षेत्रीय नेतृत्व को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राष्ट्रीय लोकप्रियता और बीजेपी के मजबूत संगठनात्मक ढांचे का समर्थन मिल रहा है।

2024 के लोकसभा चुनाव में बिहार में एनडीए को मिली 30 सीटों की जीत इसी भरोसे का उदाहरण है। मोदी की चुनावी रैलियों, राष्ट्रवाद पर केंद्रित भाषणों और योजनाओं की घोषणा ने एनडीए को विशेष रूप से महिलाओं और युवा मतदाताओं के बीच ‘साइलेंट समर्थन’ दिलाने में मदद की है। हाल ही में 20 जून को सीवान में पीएम मोदी ने 400 करोड़ रुपये की वैशाली-देवरिया रेलवे लाइन और मढ़ौरा में लोकोमोटिव निर्यात प्रोजेक्ट का उद्घाटन किया। ये घोषणाएं इस बात की पुष्टि करती हैं कि मोदी-नीतीश की जोड़ी राज्य के लिए विकास की गारंटी बन चुकी है।

सीएम नीतीश पर पीएम मोदी का भरोसा कायम, मंच से की खुलकर तारीफ

20 जून 2025 को सिवान में आयोजित एक विकास परियोजनाओं के उद्घाटन समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि “नीतीश जी के नेतृत्व में बिहार ने विकास की नई ऊंचाइयों को छुआ है, और एनडीए का साझा प्रयास राज्य को और समृद्ध बनाएगा।” इस मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री का स्वागत करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे के क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य किए हैं, जो बिहार को आगे ले जा रहे हैं। इस मंच से दोनों नेताओं की दिखाई गई एकजुटता और सामंजस्य, बिहार में एनडीए की मजबूती और आपसी तालमेल का संदेश देने की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।

एंटी-इनकंबेंसी बनी एनडीए के सामने सबसे बड़ी दीवार

हालांकि नीतीश कुमार का शासनकाल लंबा रहा है, लेकिन एंटी-इनकंबेंसी अब भी एनडीए के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। विपक्ष लगातार इस मुद्दे को उठा रहा है और तेजस्वी यादव खास तौर पर नीतीश की बार-बार गठबंधन बदलने वाली छवि और बेरोजगारी को लेकर हमला बोल रहे हैं। अगर जमीनी सच्चाई की बात करें तो हाल ही में सामने आए एक सर्वे में महागठबंधन को 126 सीटों के साथ बढ़त मिलती दिख रही है, जबकि एनडीए को 112 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है। इसके बावजूद, नीतीश कुमार की विकास योजनाएं और हालिया घोषणाएं एंटी-इनकंबेंसी के प्रभाव को कम करने की एक कोशिश के तौर पर देखी जा रही हैं।

बिहार की सियासत ले सकती है कई करवटें

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का राजनीतिक अनुभव, सुशासन मॉडल और विकास कार्य, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राष्ट्रीय लोकप्रियता के साथ जुड़ते हैं, तो यह संयोजन एनडीए को बिहार में एक मजबूत स्थिति में लाकर खड़ा करता है। एनडीए ने इस बार 225 सीटें जीतने का लक्ष्य तय किया है, भले ही यह आकड़ा महत्वाकांक्षी लगे, लेकिन नीतीश की रणनीतिक सोच और बीजेपी की संगठनात्मक ताकत इसे हासिल करने में कारगर साबित हो सकती है।

विपक्ष की रणनीतियों को निष्क्रिय करने के लिए, एनडीए ने एक बार फिर नीतीश कुमार को अपने चेहरे के रूप में आगे रखा है, जो यह दर्शाता है कि जनता के बीच अब भी उनकी स्वीकार्यता बनी हुई है। हालांकि जैसे-जैसे चुनाव नज़दीक आएंगे, बिहार की राजनीति कई मोड़ ले सकती है। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि नीतीश और मोदी की यह जोड़ी राज्य की सियासी बिसात पर कितना असर डालती है।

Advertisementspot_img

Also Read:

नेहरू-गांधी परिवार पर लगाए कॉम्प्रोमाइज के आरोप, कांग्रेस पर गरजे नितिन नबीन; कहा-‘एक समय था जब…’

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने बुधवार को पटना में एक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस और नेहरू-गांधी परिवार पर तीखा...
spot_img

Latest Stories

कुछ देशों में होली पर रंग खेलने पर हो सकती है कानूनी कार्रवाई, जानिए कौन से हैं वो देश?

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। भारत में होली सिर्फ एक त्योहार...

Chandra Grahan 2026: साल का पहला चंद्र ग्रहण और होली का संयोग, जानें सूतक में किन कार्यों से रहें दूर

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। फाल्गुन पूर्णिमा पर जहां एक ओर...

Skin Care Tips: ऑयली और डल स्किन से छुटकारा, समर में ऐसे रखें चेहरा फ्रेश और जवान

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। जैसे ही तापमान चढ़ता है, त्वचा...

Vastu Tips: घर में शांति बनाए रखने के लिए ये वास्तु उपाय, बनने लगेंगे सारे काम

नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। जीवन में सुख समृद्धि अथवा...

Iran-Israel War का भारत पर क्या होगा असर, कैसे कच्चे तेल की कीमतों को करेगा प्रभावित?

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। अमेरिका और इजरायल ने शनिवार को...