| "अँग्रेज़ी जाने बिना किसी भी वेबसाइट में उपलब्ध जानकारी की दरिया के किनारे तक भी नहीं पहुँचा जा सकता।" – ऐसा कहना अब बेकवर्ड कहलाना भी है । सच तो यह है कि कंप्यूटर और इंटरनेट प्रौद्योगिकी में हिन्दी लगातार अपनी श्रेष्ठता को रेखांकित करती चली जा रही है । बिना किसी झिझक के कहा जा सकता है कि हिन्दी माध्यम वाला प्रायमरी स्कूल का बच्चा भी बिना किसी झिझक के इंटरनेट पर ज्ञान-विज्ञान की समस्त उपलब्ध जानकारी हासिल कर सकता है । उसका साथ देने इंटरनेट पर चौबीसों घंटे तैनात जो है - रफ़्तार.काम (www.raftaar.com) ।
रफ़्तार हिन्दी का पहला ऐसा संपूर्ण ऑटोमैटेड हिंदी पोर्टल है जिसमें अँग्रेज़ी के कीबोर्ड से हिन्दी में टाइप किया जा सकता है । ट्रांसलिटरेशन, यानी कि एक भाषा के अक्षरों को दूसरी भाषा में कन्वर्ट करने वाला यह अद्वितीय ऑटोमैटेड हिंदी पोर्टल है । हिन्दी खोजने के लिए किसी तरह की अलग टायपिंग टूल की आवश्यकता नहीं पड़ने वाले इस ऑटोमैटेड हिंदी पोर्टल के पीछे है शोध और अध्ययन से संबंद्ध संस्था – इंडिकस नेटलैब्स, जिसके लिए एनआईटी जमशेदपुर के इंजीनियर और लखनऊ विवि के एमबीए पीयूष बाजपेयी ने अपने साथी डॉ. लवीश भंडारी के साथ ने इस ऑटोमैटेड हिंदी पोर्टल का निर्माण किया है । यह अपने लोकार्पण काल-26 जनवरी 2006 से ही हिन्दी के लाखों पृष्ठों को लगातार खंगालने में सफल और लोकप्रिय होता जा रहा है । हाल ही में पीयूष बाजपेयी को(टीम) उनके योगदान के लिए राष्ट्रीय मंथन एवार्ड-2007(India's Best E-content for Development) से भी नवाज़ा गया है ।
बाजपेयी बताते हैं कि भारतीय ग्रामीण अँग्रेज़ी नहीं जानते जबकि कंप्यूटर और इंटरनेट का सारा काम लगभग अंग्रेज़ी में होता है । इसलिए उन्होंने ऐसे ऑटोमैटेड हिंदी पोर्टल ईजाद करने की ज़रूरत महसूस की । सच भी है कि बहुराष्ट्रीय कंपनी भला क्यों हिन्दी पर स्वयं को फोकस करेंगे । मात्र लिखना पढ़ना आता हो । सभी तरह के वेबसाइट खुल जाते हैं। यह ऑटोमैटेड हिंदी पोर्टल या ऑटोमैटेड हिंदी पोर्टल उन अँग्रेज़ीदां एवं हितनिष्ठ लोगों के लिए करारा जबाब है जो आम हिन्दी भाषी कंप्यूटर उपयोगकर्ताओं को हतोत्साहित करते रहते हैं कि ज्ञान और विज्ञान के लिए हिन्दी अक्षम है, कि वह दोयम दर्ज़े की दक्षता वाली भाषा है । जबकि वास्तविकता यही है कि ऐसा करते वक़्त ऐसे लोग प्रकारांतर से अँग्रेज़ी और अँग्रेज़ी संस्कृति की चालाकीपूर्ण समृद्धि की चालें चलते रहते हैं ।
इंटरनेट पर हिन्दी पठन, पाठन और लेखन की चर्चा छिड़ते ही एक निराशा सी छा जाती है । आम हिन्दीभाषी अंतरजाल उपभोक्ता हाथ मलते हुए रह जाता है । कंप्यूटर और इंटरनेट पर हिदीं से जुड़ी सबसे बड़ी परेशानी फॉन्ट की रही है । बहुत सी साइट डायनामिक फॉन्ट पर बनी हैं जिस कारण उन पर खोज करना नामुमकिन था । एक जानकारी के अनुसार यह जानकारी लगभग 500 तरह के फोंट में इंटरनेट पर तितर-बितर पड़ी है । अन्य ऑटोमैटेड हिंदी पोर्टलों की तुलना में रफ़्तार एकमात्र ऐसा खोजयंत्र है जो हर तरह के फांट पर बनी साइट को खोज सकता है ।
रफ़्तार डॉट कॉम में साधारण हिन्दी से जुड़ी साइट के अलावा कैटेगरी सर्च टूल का प्रयोग कर भाषा, धर्म, कृषि, खेल, ब्लॉग, साहित्य, मनोरंजन, समाचार और भी बहुत कुछ पाया जा सकता है, वह भी सिर्फ एक क्लिक पर । इस टूल की मदद से सर्च का सफ़र छोटा करते हुए सीधे सर्च मंजिल पर पहुँचा जा सकता है । रफ़्तार.कॉम की एक और विशिष्टता उसका टायपिंग टूल है जो कीबोर्ड पर कुछ भी टंकण करने पर हिन्दी में प्रदर्शित करता है । यह न सिर्फ भारत के ही पन्नों जो यूनिकोड़ित हैं बल्कि संसार भार के सभी हिन्दी पन्नों को भी सर्च करता है । अपने अनेक विशिष्टताओं व आधुनिक तकनीक से सुसज्जित रफ़्तार बड़ी रफ़्तार से अपने पंख पसार रहा है । पीयूष बाजपेयी जैसे भारतीय मनीषा को बधाई दिया जाना चाहिए कि जिन्होंने अंग्रेज़ी का दामन थामने से बचाते हुए रफ़तार जैसा प्रिय चीज हिन्दीप्रेमियों के हाथों सौंप दी है । विश्वास किया जाना चाहिए कि भविष्य में यह शब्दों के साथ चित्र आदि भी खोजने में मदद करने लायक बन जायेगा । जो भी हो रफ़्तार जैसे उद्यमों के सहारे ही अब आम भारतीयों को समझाया जा सकता है कि भई कंप्यूटर और इंटरनेट जैसी प्रौद्योगिकी अँग्रेजी की बपौती नहीं और न ही किसी एक भाषा का नियंत्रण उस पर हो सकता है, नियंत्रित उपयोग तो उसी भाषा समूह वाले कर सकते हैं जो उसे अपनी भाषा में समृद्ध देखना चाहते हैं, उसके सहारे अपनी भाषा को समृद्ध करना भी चाहते हैं – संपूर्ण उत्तरदायित्व के साथ । भई, हम तो रफ़्तार के साथ ही हैं, आप क्यों देरी कर रहे हैं ?
http://www.srijangatha.com/2007-08/octuber07/teqnique%20-%20jay%20prakash%20manas.htm
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