मंथन अवार्ड का आयोजन टीसीएस, इंटेल, यूएनडीपी, एक्सचेंज ४ मीडिया, नासकॉम फाउंडेशन, सूचना तकनीक विभाग(भारत सरकार) सहित कई अन्य नामी गिरामी कंपनियों की मदद से किया गया था।
इंटरनेट की दुनिया में हिन्दी को बढावा देने के लिए हिन्दी सर्च इंजन रफतार डॉट कॉम को डिजीटल इम्पावरमेंट फाउंडेशन ने मंथन अवार्ड से सम्मानित किया। दिल्ली स्थित इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर में आयोजित पुरस्कार समारोह में रफतार डॉट कॉम के निदेशक पीयूष वाजपेयी ने नागालैंड विश्वविद्यालय के कुलपति के कानन से बतौर पुरस्कार शील्ड और प्रमाण पत्र ग्रहण किया। रफतार को यह अवार्ड ई-लोकेलाइजेशन की श्रेणी में दिया गया। इस श्रेणी में रफतार के अलावा दो अन्य पूजा डॉट कॉम और एचपी लैब्स इंडिया के लिपि टूलकिट को भी सम्मानित किया गया। वहीं पिछले वर्ष इस श्रेणी में कन्नड लोगो (कर्नाटक), अजागी (तमिलनाडु) और मल्टीलिंगुअल सॉफटवेयर (तमिलनाडु) को सम्मानित किया गया था।
ई-कंटेंट की दुनिया में बेहतरीन कार्य करने वाली कंपनियों को प्रोत्साहित करने के लिए डिजीटल इम्पावरमेंट फाउंडेशन की स्थापना वर्ष २००३ में किया गया था। फाउंडेशन हर वर्ष ई-लोकेलाइजेशन सहित १५ श्रेणियों में पुरस्कार देती है। वर्ष २००७ के लिए इन सभी श्रेणियों के लिए कुल ३५३ नामांकन दर्ज हुए थे और इनमें से ३९ को मंथन अवार्ड से सम्मानित किया गया। रफतार डॉट कॉम को जिस ई-लोकेलाइजेशन की श्रेणी में पुरस्कृत किया गया, उसके लिए कुल २३ नामांकन आए थे। रफतार को पुरस्कृत करते हुए फाउंडेशन ने विशेष तौर पर रेखांकित किया, ‘‘इस देश में ढेर सारे अच्छे सॉफटवेयर इंजीनियर हैं और देश-दुनिया में भारत का परचम लहरा रहे हैं। बावजूद इसके भारतीय अपनी भाषा में इंटरनेट व कम्प्यूटर पर काम नहीं कर पाते थे। रफतार ने इसी गैप को भरने का प्रयास किया है। यही नहीं, वे जानते थे कि आम हिन्दीभाषी अंग्रेज़ी की ठीक-ठाक समझ नहीं रखता है जिससे इंटरनेट की दुनिया से वे अछूते हो जाते हैं। रफतार ने इसी समझ के साथ तकनीक को लोगों पर थोपा के बजाए यूजर्सफ्रेंडली बनाने पर जोर दिया। इसने लक्षित समूह की जरूरत को ध्यान में रखकर हिन्दी सर्च इंजन को विकसित किया, क्योंकि वे समझते थे कि हिन्दीभाषी यूजर्स की जरूरत अंग्रेज़ी यूजर्स के बिल्कुल भिन्न है। यह रफतार की क्षमता का ही परिचय है कि इसने फोंट और हिन्दी शब्दों की समस्या को दूर करने का काम किया। रफतार को सम्मानित करते हुए फाउंेशन यह महसूस करता है कि इसने हिन्दीभाषी लोगों को अपनी भाषा में इंटरनेट इस्तेमाल करने की ताकत दी है।"
इस अवार्ड से सम्मानित होने वाले अन्य प्रमुख संस्थानों में ओरेकल थिंक डॉट कॉम, नेशनल पोर्टल ऑफ इंडिया, इंडिया पोस्ट की इंस्टेंट मनीऑर्डर, ई-सागूः आईटी बेस्ड एग्रो-एडवायजरी सिस्टम शामिल हैं।
पुरस्कार वितरण के अवसर पर एक सेमिनार का भी आयोजन किया गया। जिसे राष्ट्रीय ज्ञान आयोग के अध्यक्ष सैम पित्रोदा ने इलेक्ट्रोनिक तरीके से संबोधित किया। इस अवसर पर रफतार के निदेशक पीयूष वाजपेयी ने कहा कि मैं रफतार डॉट कॉम की ओर से फाउंडेशन और ज्यूरी के सदस्यों को धन्यवाद देता हूं जिन्होंने हमारी इस मेहनत को सराहा और प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि रफतार दुनिया का प्रथम सम्पूर्ण हिन्दी सर्च इंजन है और यह हिन्दी इंटरनेट को आम आदमी से जोडने में कार्यरत है। रफतार डॉट कॉम ने आम भारतीय के लिए इंटरनेट पर हिन्दी में किसी सामग्री को खोजने व पढने में आसान कर दिया है। इसके पीछे रफतार में काम कर रहे लोग हैं जिन्होंने हिन्दी को इंटरनेट पर एक नई पहचान देने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। फाउंडेशन के संरक्षकों मे प्रो पीटर ए ब्रुक (वर्ल्ड समिट अवार्ड) प्रो बिबेक देवरॉय (सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च), प्रो अनिल गुप्ता (आईआईएम अहमदाबाद), आर चंद्रशेखर (अतिरिक्त सचिव, सूचना प्रसारण मंत्रालय) और प्रोफेसर अशोक झुनझुनवाला (आईआईटी मद्रास) शामिल हैं। मंथन अवार्ड का आयोजन टीसीएस, इंटेल, यूएनडीपी, एक्सचेंज ४ मीडिया, नासकॉम फाउंडेशन, सूचना तकनीक विभाग(भारत सरकार) सहित कई अन्य नामी गिरामी कंपनियों की मदद से किया गया था। कार्यक्रम में भाग लेने वाले प्रतिनिधियों और पुरस्कृत संस्थानों के प्रमुखों का स्वागत फाउंडेशन के संस्थापक व निदेशक ओसामा मंजर ने किया।
http://www.khabarexpress.com/10/24/2007/National-e-Content-Award-to-“Raftaar-–-Integrated-Hindi-Search-Engine”-news_5056.htm |